रेवेन्यू बढ़ने के बाद भी HPCL का ₹8,974 करोड़ का घाटा रहा सबसे बड़ा झटका
✍️ बिजनेस न्यूज डेस्क, नई दिल्ली/मुंबई | अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के बाजार में भारी उथल-पुथल और घरेलू खुदरा ईंधन कीमतों के दबाव के बीच देश की तीन प्रमुख सरकारी तेल विपणन कंपनियों इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (HPCL) ने वित्त वर्ष 2020-21 से 2025-26 के पांच वर्षों में कुल मिलाकर 2,40,984 करोड़ रुपये का संचयी शुद्ध मुनाफा दर्ज किया है।
कंपनियों द्वारा स्टॉक एक्सचेंजों (BSE/NSE) को सौंपी गई आधिकारिक वार्षिक रिपोर्टों और ऑडिटेड वित्तीय विवरणों के विश्लेषण से यह खुलासा हुआ है कि शीर्ष स्तर पर रेवेन्यू में भारी इजाफे के बावजूद मुनाफे के ग्राफ में ऐतिहासिक उतार-चढ़ाव देखा गया। इस पांच वर्षीय चक्र में जहां वित्त वर्ष 2023-24 में तीनों कंपनियों ने 80,986 करोड़ रुपये का सर्वकालिक रिकॉर्ड शुद्ध मुनाफा कमाया, वहीं वित्त वर्ष 2022-23 में पेट्रोल-डीजल की अंडर-रिकवरी के चलते HPCL को 8,974 करोड़ रुपये का भारी वार्षिक घाटा भी झेलना पड़ा।
पांच वर्षों के आधिकारिक राजस्व आंकड़ों के अनुसार, कच्चे तेल के दाम 40 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने के दौरान तीनों कंपनियों का कुल रेवेन्यू लगभग दोगुना हो गया। इंडियन ऑयल का परिचालन राजस्व FY21 के 5,14,890 करोड़ रुपये से उछलकर FY23 में 9,34,953 करोड़ रुपये के शिखर पर पहुंचा, जबकि FY26 में 8,86,224 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। इस दौरान IOCL ने पांच वर्षों में कुल 1,22,143 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित कर शीर्ष स्थान बनाए रखा।
इसी तरह, भारत पेट्रोलियम (BPCL) का रेवेन्यू FY21 के 3,01,865 करोड़ रुपये से बढ़कर FY26 में 5,22,820 करोड़ रुपये रहा, जिसके दम पर कंपनी ने 5 साल में 81,802 करोड़ रुपये का कुल मुनाफा बटोरा। वहीं हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) का राजस्व FY21 के 2,69,243 करोड़ रुपये से बढ़कर FY26 में 4,78,543 करोड़ रुपये पर पहुंचा और कंपनी ने संचयी रूप से 37,039 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया।
वित्तीय नतीजों का यह सफर पूरी तरह से वैश्विक भू-राजनीतिक संकट, रिफाइनिंग मार्जिन और घरेलू मूल्य नियंत्रण से संचालित रहा। वित्त वर्ष 2022-23 में जब रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद कच्चा तेल रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा और घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल की खुदरा दरें फ्रीज कर दी गईं, तब कंपनियों को ईंधन की खुदरा बिक्री पर भारी प्रति-लीटर घाटा सहना पड़ा। इसका सबसे ज्यादा असर HPCL पर पड़ा, क्योंकि सीमित रिफाइनिंग क्षमता के कारण उसे बाजार से महंगा तेल खरीदकर घाटे में बेचना पड़ा, जिसके चलते कंपनी को 8,974 करोड़ रुपये का घाटा हुआ।
इसके ठीक विपरीत, वित्त वर्ष 2023-24 में जब कच्चे तेल की कीमतें 80-85 डॉलर के दायरे में स्थिर हुईं और भारत को रियायती दरों पर रूसी कच्चे तेल की बड़ी आपूर्ति मिली, तो कंपनियों के विपणन और सिंगापुर ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) में रिकॉर्ड सुधार हुआ। इसी स्वर्णिम दौर के चलते IOCL ने अकेले 39,619 करोड़ रुपये, BPCL ने 26,673 करोड़ रुपये और HPCL ने 14,694 करोड़ रुपये का ऐतिहासिक मुनाफा कमाकर पिछले सभी घाटे पाट दिए। वित्त वर्ष 2024-25 और 2025-26 में वैश्विक आपूर्ति सुचारू होने और रिफाइनरी विस्तार के बाद कंपनियों का शुद्ध मुनाफा क्रमशः 12,000 करोड़ रुपये से 15,000 करोड़ रुपये के सामान्य स्तर पर स्थिर दर्ज किया गया है।
