चंद्रयान-3 की अभूतपूर्व कामयाबी के बाद ISRO का महा-मिशन
गगनयान के बाद अब अंतरिक्ष में लंबे समय तक रहने की तैयारी
✍️ डिजिटल न्यूज डेस्क, नई दिल्ली | चंद्रमा के दुर्गम दक्षिणी ध्रुव पर तिरंगा फहराकर दुनिया को चौंकाने वाला भारत अब ब्रह्मांड में अपना स्थायी आशियाना बनाने की ऐतिहासिक दिशा में कदम बढ़ा चुका है। इसरो (ISRO) प्रमुख डॉ. वी. नारायणन ने अहमदाबाद में तीसरे राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के मंच से देश की सबसे बड़ी अंतरिक्ष महत्वाकांक्षा का ऐलान करते हुए बताया कि भारत 2035 तक अपना ‘भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन’ (BAS) स्थापित करने जा रहा है।
सबसे खास बात यह है कि केंद्र सरकार ने इस ऐतिहासिक परियोजना के पहले मॉड्यूल के निर्माण को हरी झंडी दे दी है। यह फैसला साबित करता है कि भारत अब महज उपग्रह लॉन्च करने वाला देश नहीं, बल्कि अंतरिक्ष में मानव सभ्यता के भविष्य को आकार देने वाला अग्रणी राष्ट्र बनने जा रहा है।
अंतरिक्ष में भारत का यह नया ठिकाना कोई साधारण स्टेशन नहीं, बल्कि आधुनिक विज्ञान का सबसे एडवांस्ड सेंटर होगा। इसे कुल पांच विशाल और अत्याधुनिक मॉड्युल्स को मिलाकर तैयार किया जाएगा।
ISRO के मास्टर प्लान के मुताबिक, साल 2028 तक इसका पहला मॉड्यूल अंतरिक्ष की कक्षा में तैनात कर दिया जाएगा, जिसके बाद 2035 तक पूरा भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन पूरी तरह फंक्शनल होकर काम करने लगेगा।
गगनयान मिशन के तुरंत बाद शुरू होने वाला यह स्टेशन ज़ीरो-ग्रेविटी (सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण) में मानव अस्तित्व, एडवांस्ड मेडिसिन, मटेरियल साइंस और स्पेस मैन्युफैक्चरिंग जैसे उन रहस्यों से पर्दा उठाएगा, जो पृथ्वी की प्रयोगशालाओं में असंभव हैं।
यह विशाल स्टेशन सिर्फ वैज्ञानिक गौरव का विषय नहीं है, बल्कि देश के आम नागरिक के जीवन को भी बदलने वाला है। भारत आज 50 से अधिक क्षेत्रों में अंतरिक्ष तकनीक का सीधा लाभ उठा रहा है- चाहे वह किसानों के लिए सटीक मौसम की भविष्यवाणी हो, समुद्र में मछुआरों की सुरक्षा, वास्तविक समय में आपदा प्रबंधन, रक्षा सुरक्षा या हाई-स्पीड नेविगेशन। 64 साल पहले एक छोटे से संकल्प से शुरू हुआ भारत का यह सफर अब आम देशवासियों के दैनिक जीवन का सबसे बड़ा रक्षक और सहायक बन चुका है।
राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने 23 अगस्त 2023 की उस ऐतिहासिक घड़ी को याद किया, जब भारत ने चांद के दक्षिणी ध्रुव पर कदम रखा था, जिसे आज पूरा विश्व ‘शिव शक्ति प्वाइंट’ के नाम से जानता है।
उन्होंने कहा कि आज भारत का स्पेस सेक्टर एक क्रांति के दौर से गुजर रहा है, जिसमें देश के करीब 440 से अधिक प्राइवेट स्पेस-स्टार्टअप्स इसरो के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं। चांद पर फतेह हासिल करने के बाद, अब 2035 का भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन दुनिया को यह संदेश दे रहा है कि 21वीं सदी के अंतरिक्ष का भविष्य अब भारत के हाथों लिखा जाएगा।
