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डॉलर, यूरो और पाउंड के मुकाबले रुपए में ऐतिहासिक गिरावट: 2014 के बाद से भारतीय मुद्रा का 60% से अधिक अवमूल्यन

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  • रुपए की ऐतिहासिक गिरावट से बिगड़ा आयात का गणित

  • डॉलर के सामने 96.56 के रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब फिसली भारतीय मुद्रा

  • 2014 के बाद से पाउंड और यूरो के आगे भी टूटी

✍️ प्रहरी संवाददाता, मुंबई / नई दिल्ली | ​वैश्विक वित्तीय बाजारों में मची उथल-पुथल और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के बीच भारतीय रुपए की सेहत खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है। पिछले सप्ताह शुक्रवार को अंतरबैंकिंग विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 96.56 के स्तर पर बंद हुआ, जो मई 2026 में बने इसके 96.96 के सर्वकालिक निचले स्तर के बेहद मुहाने पर है।
केवल डॉलर ही नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार में दबदबा रखने वाली यूरोपीय मुद्रा यूरो और ब्रिटिश पाउंड के सामने भी भारतीय मुद्रा में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है। इस बहुकोणीय अवमूल्यन ने देश के आयात बिल, चालू खाते के घाटे (CAD) और विदेशी मुद्रा भंडार के प्रबंधन पर चौतरफा दबाव बढ़ा दिया है।

​मई 2014 से लेकर अब तक के आंकड़ों का बिजनेस केस एनालिसिस करें तो पिछले बारह वर्षों में प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं के मुकाबले रुपए की क्रय शक्ति में अभूतपूर्व गिरावट आई है। वर्ष 2014 के मध्य में जहां एक अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर 59 से 60 रुपये के दायरा-मुक्त स्तर पर कारोबार कर रही थी, वहीं अब यह 96.56 के पार जा चुकी है, यानी इस अवधि में डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 60 प्रतिशत तक टूट चुका है।

इसी समयावधि में यूरो 81-82 रुपये के स्तर से छलांग लगाकर 104 रुपये के पार निकल गया है, जबकि ब्रिटिश पाउंड 98-100 रुपये के पिछले स्तर से बढ़कर 124 रुपये प्रति पाउंड के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर चुका है।

​मुद्रा बाजार के विशेषज्ञों के अनुसार, इस मैक्रो-इकोनॉमिक दबाव के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की अस्थिर कीमतें, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीतियां और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में लगातार बनी तेजी मुख्य वजह हैं। इन वैश्विक कारकों के चलते विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय इक्विटी और डेट मार्केट से भारी पूंजी निकाली है। भारी विदेशी पूंजी की निकासी और बढ़ते व्यापार घाटे (Trade Deficit) ने बाजार में डॉलर की मांग को अप्रत्याशित रूप से बढ़ा दिया है, जिससे रुपए पर लगातार बिकवाली का दबाव बना हुआ है।

​रुपए में जारी इस बेकाबू गिरावट को थामने और विनिमय दर में अप्रत्याशित अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी पूरी बैंकिंग मशीनरी को मोर्चे पर उतार दिया है। रिजर्व बैंक हाजिर बाजार (Spot Market) में अपने विदेशी मुद्रा भंडार से सीधे डॉलर बेचकर नकदी की किल्लत दूर कर रहा है, वहीं फॉरवर्ड और फ्यूचर्स मार्केट में भी तरलता संतुलन बनाए रखने के लिए आक्रामक हस्तक्षेप कर रहा है।


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