Samachar Prahari
OtherPoliticsTop 10ताज़ा खबरबिज़नेसभारतराज्य

अमेरिकी टैरिफ से भारतीय निर्यात पर दोहरा संकट, दवा और आभूषण उद्योग की चिंता बढ़ी

Share

  • 70 फीसदी निर्यात पर सीधा असर

  • जेनेरिक दवाओं पर भविष्य में 200% तक शुल्क लगाने का प्रस्ताव

  • लागत बढ़ने से मुनाफा 5% तक घटने के आसार

✍️ प्रहरी संवाददाता, मुंबई / नई दिल्ली | ​​अमेरिका द्वारा भारतीय आयात पर लागू किए गए नए ट्रेड टैरिफ से घरेलू उद्योगों और निर्यातकों के सामने गंभीर व्यावसायिक चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) और ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की नवीनतम रिपोर्ट के मुताबिक, भारत को 10 प्रतिशत के बेसलाइन टैरिफ ब्रैकेट में शामिल किया गया है। इस फैसले से अमेरिका भेजे जाने वाले कुल भारतीय निर्यात का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा सीधे तौर पर टैक्स के दायरे में आ गया है, जिससे कंपनियों के मुनाफे पर सीधा दबाव पड़ना तय है।

फार्मा सेक्टर पर मंडराया संकट, रत्न-आभूषण व्यवसाय में हलचल

सेक्शन 301 के तहत लागू इस नए शुल्क से सर्वाधिक जोखिम फार्मास्यूटिकल्स और जेनेरिक दवाओं के क्षेत्र पर देखा जा रहा है। वर्तमान में अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली जेनेरिक दवाओं की 47 फीसदी आपूर्ति भारत से होती है, जिसका सालाना मूल्य करीब 9.7 अरब डॉलर है।

नए नियमों के अंतर्गत इन दवाओं पर 2028 से 100 प्रतिशत और 2029 से 200 प्रतिशत तक का भारी-भरकम दंडात्मक शुल्क प्रस्तावित किया गया है। यद्यपि अगले दो वर्षों के लिए इस सेक्टर को अस्थायी राहत दी गई है, लेकिन दीर्घकाल में दिग्गज भारतीय दवा कंपनियों को अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स अमेरिका स्थानांतरित करने पर विवश होना पड़ सकता है। इस फैसले से रत्न एवं आभूषण (जेम एंड ज्वेलरी) क्षेत्र पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जिसे लेकर ऑल इंडिया जेम एंड ज्वेलरी डोमेस्टिक काउंसिल (GJC) ने केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

मैन्युफैक्चरिंग हब्स की लागत बढ़ी, द्विपक्षीय वार्ता से मिला आंशिक सहारा

दूसरी ओर, टेक्सटाइल, गारमेंट्स, केमिकल्स और इंजीनियरिंग सामानों पर 10 प्रतिशत का नया शुल्क लगने से तिरुपुर तथा लुधियाना जैसे प्रमुख औद्योगिक केंद्रों की लागत बढ़ गई है। अमेरिकी आयातक इस अतिरिक्त दर का बोझ भारतीय सप्लायर्स पर डाल रहे हैं, जिससे निर्यातकों का शुद्ध मुनाफा दो से पांच प्रतिशत तक घटने का अनुमान है।

हालांकि, स्टील, एल्युमीनियम और ऑटो पार्ट्स पर धारा 232 के तहत पूर्व में लागू 25 से 50 प्रतिशत के टैरिफ को यथावत रखते हुए नए 10 फीसदी शुल्क से मुक्त रखा गया है। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि द्विपक्षीय वार्ताओं के कारण भारत को चीन (30-35%) की तुलना में 18 प्रतिशत की पारस्परिक सीमा का लाभ मिला है, जिससे वैश्विक बाजार में भारतीय सामानों की प्रतिस्पर्धात्मकता बनी रहेगी।

 


Share

Related posts

‘फडणवीस अब भी राज्य के सीएम समझते हैं, उन्हें बधाई!’

samacharprahari

अखिलेश यादव का बड़ा आरोप: SIR के नाम पर विपक्षी वोट हटाने की साजिश?

samacharprahari

टीआरपी प्रकरण: बार्क के पूर्व सीईओ की जमानत अर्जी पर सुनवाई स्थगित

Girish Chandra

Leave a Comment