प्रशासक राज के खर्चों पर कांग्रेस ने मांगा श्वेतपत्र, मनपा आयुक्त की सफाई से गहराया विवाद
✍️ प्रहरी संवाददाता, मुंबई | देश की सबसे अमीर महानगरपालिका (BMC) की तिजोरी खाली होने के कगार पर पहुंच गई है। बीते लगभग चार वर्षों 7 मार्च 2022 से 11 फरवरी 2026 तक बिना किसी निर्वाचित सदन, मेयर या सार्वजनिक जवाबदेही के चले ‘प्रशासक राज’ में बीएमसी की रीढ़ मानी जाने वाली फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) में 13,785 करोड़ रुपए का भारी-भरकम सेंध लग चुका है। वर्ष 2021-22 में 91,690 करोड़ रुपए के शिखर पर मौजूद आरक्षित जमा घटकर सीधे 77,905 करोड़ रुपए पर आ गिरी है। 2.44 लाख करोड़ रुपए की भारी भरकम इंफ्रास्ट्रक्चर देनदारियों के बीच बंद कमरों में लिए गए वित्तीय फैसलों ने बीएमसी के वित्तीय स्थिरता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है, जिसके खिलाफ विपक्षी कांग्रेस ने मनपा आयुक्त अश्विनी भिडे से 30 दिनों के भीतर ‘श्वेतपत्र’ जारी करने का अल्टीमेटम दिया है।
बीएमसी में कांग्रेस विधायक दल के नेता अशरफ आजमी ने मनपा आयुक्त को कड़ा पत्र भेजते हुए सवाल उठाया है कि निर्वाचित सदन की गैर-मौजूदगी में आरक्षित निधियों से अंधाधुंध निकासी को किस स्तर पर मंजूरी दी गई।
आजमी ने महापौर रितु तावड़े से तत्काल विशेष बैठक बुलाने का आग्रह करते हुए कहा कि मुंबई कोस्टल रोड, गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड (जीएमएलआर), सड़कों के बड़े पैमाने पर सीमेंटीकरण और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट जैसी अरबों की परियोजनाओं के लिए किए गए भुगतानों, आंतरिक खाता हस्तांतरण और वास्तविक खर्चों का पाई-पाई का हिसाब स्थायी समिति के पटल पर रखा जाना चाहिए।
कांग्रेस का आरोप है कि बीएमसी के बजट 2026-27 में 48,164 करोड़ रुपए का भारी पूंजीगत व्यय प्रस्तावित है, और आने वाले सात-आठ वर्षों तक ठेकेदारों को सालाना करीब 28,000 करोड़ रुपए का भुगतान करना पड़ सकता है, ऐसे में आरक्षित निधियों का यह दोहन भविष्य में लिक्विडिटी संकट पैदा कर कर्मचारियों के वेतन, पेंशन और बुनियादी नागरिक सेवाओं को ठप कर देगा।
चौतरफा हमलों के बीच नगर आयुक्त अश्विनी भिडे ने सफाई देते हुए कहा है कि 77,905.39 करोड़ रुपए की जमा का आंकड़ा 31 मार्च 2026 का था, जो 13 अक्टूबर 2026 तक बढ़कर 79,873.39 करोड़ रुपए हो चुका है। प्रशासन का तर्क है कि 2021-22 में महामारी के दौरान कम खर्च और डेवलपर्स को दी गई रियायतों से प्राप्त 15,493 करोड़ रुपए के राजस्व के कारण जमा बढ़ी थी, जिसे बाद में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और फरवरी-मार्च 2026 में हुए 16,071.40 करोड़ रुपए के पूंजीगत भुगतानों के चलते घटना स्वाभाविक था।
हालांकि, विपक्ष ने इस दावे की हवा निकालते हुए स्पष्ट किया है कि कुल जमा में से 44,826.23 करोड़ रुपए की भारी रकम भविष्य निधि, पेंशन, ग्रेच्युटी और ठेकेदारों की सुरक्षा जमा जैसी अनिवार्य देनदारियों के लिए बंधी है, जिसे छुआ तक नहीं जा सकता। ऐसे में उपलब्ध सीमित आरक्षित पूंजी के तेजी से घटने पर बंद कमरों में लिए गए वित्तीय फैसलों की सार्वजनिक जवाबदेही तय होना अब अनिवार्य हो गया है।
