Samachar Prahari
OtherPoliticsTop 10ताज़ा खबरदुनियाबिज़नेसभारतराज्य

ग्रीनलैंड पर ट्रंप का ‘परमानेंट कंट्रोल’ का दावा, आर्कटिक में शक्ति-संतुलन बदलने की आहट

Share

  • आर्कटिक क्षेत्र में भू-राजनीतिक हलचल तेज

  • ग्रीनलैंड पर ट्रंप का बड़ा दांव: अमेरिका को मिलेगी स्थायी सुरक्षा भूमिका, रूस-चीन पर क्या असर?

✍️ डिजिटल न्यूज डेस्क, मुंबई/नई दिल्ली | अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर एक अत्यंत संवेदनशील और बड़े सुरक्षा समझौते की घोषणा की है, जिसने आर्कटिक क्षेत्र में भू-राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। ट्रंप के दावों के मुताबिक, अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच हुए एक नए समझौते से अमेरिका को ग्रीनलैंड की सुरक्षा और उससे जुड़ी महत्वपूर्ण जरूरतों पर ‘स्थायी नियंत्रण’ (परमानेंट सिक्योरिटी कंट्रोल) मिल जाएगा।

राष्ट्रपति ट्रंप ने इस प्रस्तावित समझौते को एक “इनफिनिट लाइफ एग्रीमेंट” (Infinite Life Agreement) करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस समझौते के तहत अमेरिका ग्रीनलैंड में अपनी बड़ी सैन्य मौजूदगी विकसित करने की प्रक्रिया तत्काल शुरू करेगा। ट्रंप की घोषणा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अब अमेरिका की लिखित मंजूरी के बिना किसी भी अमेरिकी प्रतिद्वंद्वी देश (संकेत रूस और चीन की ओर है) को ग्रीनलैंड में सैन्य अड्डा बनाने, सैन्य मौजूदगी दर्ज कराने या किसी भी प्रकार का संवेदनशील निवेश करने की अनुमति नहीं होगी।

​हालांकि, ट्रंप के इस “परमानेंट कंट्रोल” वाले दावे और डेनमार्क-ग्रीनलैंड की आधिकारिक स्थिति में एक बड़ा विरोधाभास है। डेनमार्क और ग्रीनलैंड द्वारा जारी आधिकारिक बयानों के अनुसार, यह समझौता डेनमार्क की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और ग्रीनलैंड के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार को पूरी तरह मान्यता देता है। तीनों पक्ष अगले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान इस पर हस्ताक्षर करने की उम्मीद कर रहे हैं, जिसके बाद इसे संबंधित संसदों की मंजूरी लेनी होगी।

​भले ही ग्रीनलैंड पर अमेरिका का संप्रभु अधिकार स्थापित नहीं हुआ है, लेकिन प्रस्तावित समझौता आर्कटिक और उत्तरी अटलांटिक सुरक्षा व्यवस्था में अमेरिका की रणनीतिक पकड़ को अभूतपूर्व रूप से मजबूत करने का संकेत है। ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति इसे रूस और चीन की आर्कटिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है। यदि यह समझौता लागू होता है, तो ग्रीनलैंड में अमेरिकी सैन्य बुनियादी ढांचे का भारी विस्तार और आर्कटिक निगरानी क्षमता में वृद्धि निश्चित है, जो इस क्षेत्र में शक्ति-संतुलन को अमेरिका के पक्ष में निर्णायक रूप से मोड़ सकता है।


Share

Related posts

दिल्ली में एक ही नगर निगम, कानूनी मान्यता मिली

Vinay

अमेरिकी सैनिकों पर गोली चलाने से नहीं हिचकेगा चीन!

samacharprahari

रूस में सुनामी की ऊंची लहरें, जापान में न्यूक्लियर प्लांट खाली… 8.8 तीव्रता के भूकंप ने मचाई तबाही

samacharprahari

Leave a Comment