भारत मंडपम में जुट रहे शीर्ष विश्व नेता
‘ग्लोबल साउथ’ के आर्थिक हितों, स्टार्टअप फंड और आपूर्ति श्रृंखलाओं की सुरक्षा पर केंद्रित रहेगा दो दिवसीय महामंथन
✍️ डिजिटल न्यूज डेस्क, नई दिल्ली/मुंबई | गंभीर भू-राजनीतिक संघर्षों, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं के साये के बीच भारत की राजधानी नई दिल्ली 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए पूरी तरह तैयार है।
प्रगति मैदान स्थित अत्याधुनिक भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर को आयोजित होने वाला यह दो दिवसीय महामंथन संगठन के अभूतपूर्व विस्तार के बाद एक अत्यंत महत्वपूर्ण मोड़ पर हो रहा है। साल 2006 में ब्राजील, रूस, भारत और चीन के साथ शुरू हुए और 2011 में दक्षिण अफ्रीका के प्रवेश से मजबूत हुए इस गठबंधन ने हाल ही में व्यापक विस्तार देखा है।
जनवरी 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात, जबकि जनवरी 2025 में इंडोनेशिया के जुड़ने के बाद अब यह 11 पूर्ण सदस्य देशों और कई साझीदार देशों का एक ऐसा शक्तिशाली वैश्विक मंच बन चुका है, जो दुनिया की लगभग आधी आबादी और महत्वपूर्ण आर्थिक ताकत का प्रतिनिधित्व करता है। इस ऐतिहासिक बैठक में भाग लेने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका समेत सभी 11 सदस्य देशों के शीर्ष राष्ट्राध्यक्ष और उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल दिल्ली पहुंच रहे हैं।
भारत की 2026 की अध्यक्षता का मूल विषय ‘रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी’ (RICS) तय किया गया है, जिसके जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत इस सम्मेलन को महज राजनीतिक संवाद से आगे ले जाकर ठोस और व्यावहारिक आर्थिक भागीदारी का स्वरूप देने जा रहा है। भारत की यह पूरी रूपरेखा चार प्रमुख स्तंभों पर टिकी है। पहला स्तंभ ‘रेजिलिएंस’ वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं, ऊर्जा सुरक्षा और स्वास्थ्य प्रणालियों को भू-राजनीतिक झटकों व जलवायु संकट से सुरक्षित करने पर केंद्रित है।
दूसरा स्तंभ ‘इनोवेशन’ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), वित्तीय तकनीक और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साझा उपयोग को बढ़ावा देता है। तीसरा स्तंभ ‘कोऑपरेशन’ व्यापार बाधाओं को दूर करने, स्थानीय मुद्राओं में लेनदेन को सरल बनाने और विकास वित्तपोषण को गति देने के लिए समर्पित है। चौथा स्तंभ ‘सस्टेनेबिलिटी’ हरित वित्त, ऊर्जा संक्रमण और दीर्घकालिक सतत विकास लक्ष्यों को व्यावहारिक रूप से लागू करने पर जोर देता है।
व्यापार और छोटे उद्योगों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ने के लिए भारत ने इस मंच से कई दूरगामी आर्थिक पहलों को आगे बढ़ाया है। भारत ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) की नकदी समस्या को हल करने के लिए एक विशेष ‘ब्रिक्स इनवॉइस डिस्काउंटिंग मैकेनिज्म’ और सभी सदस्य देशों के वित्तीय संस्थानों व तकनीक केंद्रों को जोड़ने वाले ‘ब्रिक्स एमएसएमई सहयोग पोर्टल’ का प्रस्ताव रखा है।
वहीं, युवा उद्यमियों और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए ‘ब्रिक्स इनक्यूबेटर नेटवर्क’ की स्थापना तथा शुरुआती पूंजी उपलब्ध कराने के लिए ‘ब्रिक्स स्टार्टअप इनोवेशन फंड’ का खाका तैयार किया गया है। कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने के उद्देश्य से भारत डिजिटल एग्रीकल्चर नेटवर्क का नेतृत्व कर रहा है, जिसमें एआई और भू-स्थानिक उपकरणों को खेती से जोड़ा जाएगा, जबकि बीजों और कृषि इनपुट्स के आदान-प्रदान के लिए ‘एग्रीन’ नेटवर्क और किसानों के अधिकारों पर वैश्विक मंच को आगे बढ़ाया जा रहा है।
स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण के मोर्चे पर भी नई दिल्ली बैठक से कई अहम दिशा-निर्देश तय होने जा रहे हैं। हाल ही में चंडीगढ़ में आयोजित स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक के आधार पर सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज, महामारी से निपटने की पूर्व तैयारी और सस्ती जीवनरक्षक दवाओं की निर्बाध आपूर्ति पर सदस्य देशों के बीच सहमति बनी है।
इसके अतिरिक्त, संक्रामक बीमारियों से आगे बढ़कर भारत ने बेंगलुरु स्थित ‘निमहंस’ के जरिए सदस्य देशों में मानसिक स्वास्थ्य सहयोग के लिए एक एकीकृत तंत्र स्थापित करने की पहल की है।
अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में संरचनात्मक सुधार, बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली में विश्व व्यापार संगठन (WTO) की केंद्रीय भूमिका को बनाए रखने और सीमा पार डिजिटल भुगतान को सुगम बनाने की दिशा में यह बैठक निर्णायक साबित हो सकती है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय विवादों और सदस्य देशों के बीच कुछ संवेदनशील मतभेदों के बावजूद, भारतीय कूटनीति सभी 11 देशों की आम सहमति से एक मजबूत, संतुलित और भविष्योन्मुखी नई दिल्ली घोषणापत्र जारी कराने की दिशा में पूरी तरह सक्रिय है।
