लोन फ्रॉड के मामले 72% घटे, लेकिन रकम 4 गुना उछलकर ₹48,000 करोड़ के पार; सरकारी बैंकों में 74% हिस्सेदारी
औसतन प्रति फर्जी लोन की रकम ₹34 लाख से बढ़कर ₹4.7 करोड़ पर पहुंची
डिजिटल लेंडिंग और फर्जी दस्तावेजों के जरिए संगठित गिरोहों ने सरकारी बैंकों को बनाया मुख्य निशाना
✍️विशेष संवाददाता, मुंबई / नई दिल्ली | देश के बैंकिंग तंत्र में लोन फर्जीवाड़े का स्वरूप तेजी से बदल चुका है। छोटे-मोटे लोन घोटालों की जगह अब संगठित सिंडिकेट्स ने हाई-वैल्यू डिजिटल सेंधमारी शुरू कर दी है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की वर्ष 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट और एक्सपेरियन (Experian) के ताजा विश्लेषण के मुताबिक, पिछले तीन वर्षों में संदिग्ध और फर्जी लोन आवेदनों की कुल संख्या में तो 72 फीसदी की भारी गिरावट आई है, लेकिन इनमें फंसी रकम चार गुना बढ़कर ₹48,021 करोड़ के भयावह आंकड़े पर पहुंच गई है।
आरबीआई की रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि पूरे बैंकिंग सेक्टर में उजागर हुए कुल फर्जीवाड़े की रकम में से करीब 74 फीसदी (लगभग ₹35,709 करोड़) की चपत अकेले सरकारी बैंकों (PSBs) को लगी है।
सरकारी बैंकों में प्रति केस औसत आकार 5 गुना बढ़ा
वित्त वर्ष 2024 में सभी वित्तीय संस्थानों में 36,060 संदिग्ध आवेदन सामने आए थे, जो वित्त वर्ष 2026 में घटकर 10,114 रह गए। इसके उलट कुल संदिग्ध रकम ₹12,230 करोड़ से छलांग लगाकर ₹48,021 करोड़ पर पहुंच गई। सरकारी बैंकों के आंकड़े बताते हैं कि जहां FY24 में ₹9,254 करोड़ के 7,460 संदिग्ध मामले थे, वहीं FY26 में मामलों की संख्या घटकर 5,418 रह गई, लेकिन इनमें शामिल रकम करीब चार गुना बढ़कर ₹35,709 करोड़ हो गई।
इसका सीधा असर यह हुआ कि सरकारी बैंकों में प्रति संदिग्ध आवेदन का औसत आकार ₹1.2 करोड़ से बढ़कर ₹6.6 करोड़ तक पहुंच गया, जबकि पूरे बैंकिंग सेक्टर का यह औसत ₹34 लाख से बढ़कर ₹4.7 करोड़ हो चुका है। निजी बैंकों में FY26 में 3,956 मामलों में ₹11,399 करोड़ की गड़बड़ी दर्ज की गई।
डिजिटल लेंडिंग की कमजोरियों का फायदा, ‘सिंथेटिक आइडेंटिटी’ और फर्जी पैन से बड़ा खेल
रिपोर्ट के अनुसार, जालसाज अब बड़ी संख्या में छोटे लोन आवेदन करने के बजाय संगठित नेटवर्क बनाकर डिजिटल लेंडिंग की खामियों का फायदा उठा रहे हैं। ऑनलाइन लोन देने की होड़ और बिना किसी भौतिक सत्यापन (फिजिकल वेरिफिकेशन) के तुरंत लोन जारी करने की प्रक्रिया ने सिंडिकेट्स को मौका दिया है।
जालसाज अब ‘सिंथेटिक आइडेंटिटी’ (फर्जी पहचान), ‘म्यूल अकाउंट्स’, फर्जी आय प्रमाण पत्र, झूठे रोजगार विवरण और एक ही व्यक्ति के कई पैन कार्ड का इस्तेमाल कर हाई-वैल्यू लोन हासिल कर रहे हैं। कंसोर्टियम-स्तरीय जांच में यह भी सामने आया कि वित्तीय संस्थानों के बीच वास्तविक समय में सूचनाओं के तालमेल की कमी के कारण एक ही फर्जी प्रोफाइल पर कई बैंकों से भारी-भरकम लोन उठा लिए गए।
