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एनारॉक रिपोर्ट Q2 2026: नीतिगत दरें स्थिर, फिर भी किफायती घरों का संकट बढ़ा; बिक्री 6% घटी

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✍️ प्रहरी संवाददाता, मुंबई |  भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने अपनी नीतिगत ब्याज दरों (Repo Rate) में कोई बदलाव न करके अर्थव्यवस्था को स्थिरता देने का संदेश तो दे दिया है, लेकिन आम और मध्यम वर्ग के लिए अपने घर का सपना अब भी उतना ही दूर है। बड़े शहरों में बन रहे घर अब आम नागरिक की पहुंच से बाहर होकर सिर्फ बड़े निवेशकों का खेल बनते जा रहे हैं। मौजूदा रियल एस्टेट बाजार का यह ‘संतुलन’ दरअसल एक छलावा है।

एनारॉक (ANAROCK) की वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही (Q2 2026) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, देश के शीर्ष सात प्रमुख शहरों में कुल आवासीय बिक्री साल-दर-साल (YoY) आधार पर 6 प्रतिशत घटकर लगभग 90,715 यूनिट रह गई है।

रिपोर्ट में सबसे चिंताजनक पहलू किफायती आवास (Affordable Housing) की घटती हिस्सेदारी और बाजार की नई आपूर्ति के बीच का असंतुलन बनकर उभरा है। एक तरफ जहां शीर्ष शहरों में कुल नई आवासीय आपूर्ति (New Supply) साल-दर-साल 7 प्रतिशत की बढ़त के साथ लगभग 1.06 लाख यूनिट तक पहुंच गई है, वहीं दूसरी तरफ इस कुल आपूर्ति में किफायती घरों की हिस्सेदारी सिकुड़कर महज 6 प्रतिशत रह गई है। मांग और आपूर्ति का यह बढ़ता अंतर भारतीय रियल एस्टेट क्षेत्र के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ा कर रहा है।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, किफायती आवास श्रेणी ब्याज दरों को लेकर सबसे अधिक संवेदनशील (Rate-sensitive) होती है। वर्तमान में शीर्ष शहरों में आवासीय दरों में औसतन 7 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर जारी है। ऐसे में नीतिगत दरों का केवल स्थिर बने रहना ही मध्यम और निम्न-आय वर्ग के खरीदारों के लिए घरों की सामर्थ्य (Affordability) सुधारने में नाकाफी है।

एनारॉक के आंकड़े दर्शाते हैं कि भारतीय रियल एस्टेट बाजार समग्र रूप से भले ही एक संतुलित स्थिति की ओर बढ़ रहा हो, लेकिन यह संतुलन बड़े पैमाने पर आम नागरिकों को घर मालिक बनाने वाले मास-मार्केट से नहीं, बल्कि हाई-एंड और लग्जरी हाउसिंग सेगमेंट की मजबूत मांग के दम पर आ रहा है। व्यापक स्तर पर होम-ओनरशिप को बढ़ावा देने वाले किफायती खंड की अनदेखी से रियल एस्टेट सेक्टर की समग्र रिकवरी पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे है


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