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फिर बाहर निकलेगा मराठी-गैर मराठी का जिन्न !

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राज्यपाल कोश्यारी के बयान के बाद मराठी अस्मिता के नाम पर उद्धव को मिला पार्टी बचाने का मौका

नई दिल्ली। मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद उद्धव ठाकरे को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उनके सामने पार्टी बचाने की बड़ी चुनौती है। बैकफुट में नजर आ रहे उद्धव को राज्यपाल के बयान ने सत्ताधारी पार्टी को घेरने का एक अवसर दे दिया है।

महाराष्ट्र में सत्ता पलटने के बाद शिवसेना के अस्तित्व पर सवाल खड़े हो गए हैं। उद्धव लगातार सरकार पर हमला कर रहे हैं। हालांकि उनको कोई ऐसा मुद्दा नहीं मिल रहा था, जिससे वह अपनी पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश भर सकें। अब उनको एक मुद्दा मिल गया है।

उन्होंने कहा कि अब यह तय करने का समय आ गया है कि उन्हें (राज्यपाल को) घर वापस भेजा जाए या जेल भेजा जाए। राज्यपाल को अपने बयान पर माफी मांगनी चाहिए।

महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने एक कार्यक्रम में कहा कि अगर मुंबई से गुजरातियों और राजस्थानियों को हटा दिया जाए, तो शहर के पास न तो पैसे रहेंगे और न ही वित्तीय राजधानी का तमगा। इस बयान के बाद महाराष्ट्र की सियासत एक बार फिर गरमाने लगी है।


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